टैक्स और नीति
भारत में क्रिप्टो टैक्स 2026: पूरी गाइड
भारत में क्रिप्टो पर टैक्स कैसे लगता है: 30% टैक्स, 4% सेस, 1% TDS, लॉस के नियम, गिफ़्ट और एयरड्रॉप, और ITR में इसे कैसे भरें।
भारत में क्रिप्टो पर "वर्चुअल डिजिटल एसेट" यानी VDA के रूप में टैक्स लगता है। इसमें क्रिप्टोकरेंसी, USDT जैसे स्टेबलकॉइन और ज़्यादातर NFT आते हैं। ये नियम अप्रैल 2022 से लागू हैं और 2026–27 के बजट में इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ।
VDA क्या है?
VDA कोई भी ऐसा डिजिटल टोकन है जो क्रिप्टोग्राफ़ी से बना हो और जिसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ट्रांसफ़र, स्टोर या ट्रेड किया जा सके। जैसे Bitcoin, Ethereum, Solana, USDT और मीम कॉइन। RBI का डिजिटल रुपया (e₹) VDA नहीं है।
मुनाफ़े पर 30% टैक्स
जब आप VDA ट्रांसफ़र करते हैं, तो मुनाफ़े पर 30% टैक्स लगता है। ट्रांसफ़र में शामिल है:
- क्रिप्टो बेचकर रुपये लेना
- एक कॉइन को दूसरे में स्वैप करना, जैसे ETH से USDT
- क्रिप्टो से कोई सामान या सेवा खरीदना
मुनाफ़ा = जो मिला, उसमें से खरीद की कीमत घटाएँ। टैक्स पर 4% सेस जुड़ता है, यानी कुल असर 31.2% (सरचार्ज से पहले)। कोई बेसिक छूट या स्लैब का फ़ायदा नहीं मिलता।
1% TDS
बिक्री पर 1% TDS कटता है। भारतीय एक्सचेंज यह आपकी ओर से काटते हैं, आम तौर पर हर बिक्री पर। यह कोई अलग टैक्स नहीं है: यह आपके Form 26AS और AIS में दिखता है और ITR भरते समय आपके टैक्स से घट जाता है। अगर TDS आपके टैक्स से ज़्यादा है, जो लॉस वाले साल में अक्सर होता है, तो बाक़ी रकम रिफ़ंड हो जाती है। ज़्यादा जानकारी: crypto TDS refund (अंग्रेज़ी में)।
लॉस: सबसे सख़्त नियम
क्रिप्टो लॉस को:
- सैलरी, बिज़नेस या किसी और इनकम से सेट-ऑफ़ नहीं कर सकते,
- दूसरे क्रिप्टो के मुनाफ़े से भी सेट-ऑफ़ नहीं कर सकते, और
- अगले साल कैरी-फ़ॉरवर्ड नहीं कर सकते।
उदाहरण: Bitcoin पर ₹50,000 का मुनाफ़ा और एक मीम कॉइन पर ₹50,000 का लॉस हुआ, तो भी पूरे ₹50,000 मुनाफ़े पर टैक्स देना होगा।
गिफ़्ट, एयरड्रॉप और स्टेकिंग
- गिफ़्ट: रिश्तेदार से मिला क्रिप्टो टैक्स-फ़्री है। ग़ैर-रिश्तेदारों से साल भर में ₹50,000 से ज़्यादा के गिफ़्ट आपकी स्लैब दर पर टैक्सेबल हैं।
- एयरड्रॉप: आम तौर पर मिलने पर इनकम माने जाते हैं, और बेचने पर 30% नियम लगता है।
- स्टेकिंग रिवॉर्ड: आम तौर पर मिलने पर इनकम, फिर बेचने पर 30%।
ITR में कैसे भरें
क्रिप्टो का मुनाफ़ा Schedule VDA में जाता है, जो ITR-2 और ITR-3 में है, ITR-1 या ITR-4 में नहीं। हर ट्रांसफ़र की खरीद की तारीख, बिक्री की तारीख, कीमत और बिक्री मूल्य भरना होता है। स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: Schedule VDA guide (अंग्रेज़ी में)।
बजट 2026 में क्या बदला?
टैक्स दरें नहीं बदलीं: 30% टैक्स और 1% TDS जारी हैं। बजट ने उन प्लेटफ़ॉर्म पर पेनल्टी जोड़ी जो क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन की रिपोर्ट नहीं भरते या ग़लत भरते हैं: ₹200 प्रति दिन और ₹50,000। इसका मतलब है कि आपकी ट्रेडिंग टैक्स विभाग के रिकॉर्ड में और सही तरीके से दिखेगी।
नया इनकम-टैक्स एक्ट
1 अप्रैल 2026 से इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 लागू है। VDA के नियम वही हैं, बस सेक्शन नंबर बदल गए हैं। पुरानी गाइड में आप Section 115BBH (30% टैक्स) और Section 194S (TDS) देखेंगे; नए एक्ट में ये section 194 और section 393(1) में हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर मैं बैंक में पैसा नहीं निकालता, तो क्या टैक्स नहीं लगेगा?
लगेगा। एक कॉइन से दूसरे में स्वैप करना भी टैक्सेबल ट्रांसफ़र है।
क्या सिर्फ़ होल्ड करने पर टैक्स लगता है?
नहीं। टैक्स ट्रांसफ़र पर लगता है, होल्ड करने पर नहीं।
क्या 30% से कम टैक्स देने का कोई तरीका है?
मुनाफ़े पर कानूनी तौर पर नहीं। लेकिन सही रिकॉर्ड रखकर और पूरा TDS क्लेम करके ज़्यादा टैक्स देने से बच सकते हैं।